सामाजिक मीडीया का भारतीय समाज पर प्रभाव

 

डा. श्रीमती हेमलता बोरकर वासनिक

सहायक प्राध्यापक, समाजाास्त्र अध्ययनषाला, पं.रविषंकर शुक्ल विष्वविद्यालय, रायपुर (..)

 

सामाजिक मीडीया एक ऐसा इलेक्ट्रानिक माध्यम है जिसके जरिये लोग उक्त माध्यम में षामिल सदस्यों के साथ विचारों का आदान-प्रदान कर सकते है। समकालीन समाज में सामाजिक मीडीया का प्रभाव पूरे विष्व जगत में दिखलाई पड़ रहा है।

 

सामाजिक मीडीयाभारतीय समाजप्रभाव

 

 

सामाजिक मीडीया एक ऐसा इलेक्ट्रानिक माध्यम है जिसके जरिये लोग उक्त माध्यम में षामिल सदस्यों के साथ विचारों का आदान-प्रदान कर सकते है। समकालीन समाज में सामाजिक मीडीया का प्रभाव पूरे विश्व जगत में दिखलाई पड़ रहा है। आज दुनिया की ऐसी कोई खबर या घटना नहीं जो आम आदमी की पहुंच से दूर हो, यहाॅ तक की किसी भी सामाजिक घटना के पक्ष एवं विपक्ष की बातें आज चंद मिनटों में विश्व के प्रत्येक मानव को उपलब्ध हो रही है जिसका सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव भारतीय समाज पर देखा जानें लगा है।

 

विष्वभर में लगभग 200 सोषल नेटवर्किग साइट्स जिनमें वाट्सअप, फेसबुक, ट्वीटर, आर्कुट, माईस्पेस, लिंक्डगन तथा इंस्टाग्राम सबसे अधिक लोकप्रिय सोषल साइट्स की श्रेणी में है। एक सर्वे के मुताबिक विष्वभर में संप्रति 1 अरब 28 करोड़ फेसबुक यूजर्स हैं। 15 करोड़ इंस्टाग्राम, 20 करोङ व्यक्ति लिंक्डगन, 3 करोड़ माईस्पेस एवं 9 करोङ व्यक्ति ट्वीटर से जुङे हुए हैं।1

 

भारत में इलेक्ट्रानिक सोशल मीडीया का जन्म 1995 के आसपास माना  जाता हैं। 1995 में क्लास मेट्स डाॅटकाॅम साइट्स की शुरूआत की गयी। सन् 1996 में बोटर डाॅट काॅम तथा 1997 में एशियन एवेन्यू डाॅट काॅम साइट्स लाॅच किया गया। 2004 में फेसबुक, 2009 में वाट्सअप साइट्, 2010 में लिक्डगन तथा आर्कुट 2014 में लाॅच किया गया।2

 

सामाजिक मीडिया की परिभाषा-

आक्सफोर्ड डिक्सनरी के अनुसार- ऐसी वेबसाइट और ऐपिलकेशन जो उपभोक्ताओं को सामग्री तैयार करने और साझा करने में समर्थ बनाता है सोशल मीडीया कहलाता हैं।3

 

 

अध्ययन का उद्देश्य -

प्रस्तुत शोधकार्य के निम्नलिखित उद्देष्य है-

1.   वाट्सअप एवं फेसबुक का भारतीय समाज पर सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव को ज्ञात करना।

2.   वाट्सअप एवं फेसबुक के प्रति उपभोक्ताओं के दृष्टिकोण को ज्ञात करना।

 

अध्ययन परिकल्पना -

1.   महिलाओं की तुलना में पुरूषों के द्वारा सामाजिक मीडीया का अधिक उपयोग किया जाता है।

2.   वृध्द की तुलना में युवा वर्ग अधिक सामाजिक मीडीया के संपर्क में रहता है।

3.   अन्य आयु वर्ग की अपेक्षा टीनेजर्स के द्वारा सामाजिक मीडीया का अधिक गलत प्रयोग किया जाता है।

 

अध्ययन पध्दति-

प्रस्तुत शोध पत्र अध्ययन पध्दति को 4 भागों में बाॅटा गया-

 

. अध्ययन क्षेत्र का संक्षिप्त परिचय-

शोध कार्य हेतु रायपुर नगर का चयन किया गया है। रायपुर .. राज्य की राजधानी हैं। राजधानी रायपुर वर्तमान में सर्वाधिक विकसित शहरों में से एक है यहाॅ सभी प्रकार के बुध्दिजीवी वर्ग निवास करते है जैसे-डाॅक्टर, इंजीनियर ,छात्र, राजनीतिज्ञ,शिक्षक, समाजसेवक, व्यायसायी एवं पुलिस यह शहर मुबंई हावङा रेलमार्ग पर स्थित है।

.उत्तरदाताओं का चयन-

2011 की जनगणनानुसार जनसंख्या 1,010,087 है। रायपुर नगर को 8 जोन में विभाजित किया गया है जिसके अंतर्गत 70 वार्ड आते है। अध्ययन हेतु 4 जोन से एक-एक वार्ड का अर्थात् 4 वार्ड का चयन किया गया है, 4 वार्ड में कुल परिवारों की संख्या 5541 है, इनमें से 250 परिवार का चयन दैव निदर्शन के लाॅटरी प्रणाली के माध्यम से किया गया है।4

इस अध्ययन में एक परिवार से उन्हीं उत्तरदाताओं का चयन किया गया है,जो मोबाईल में फेसबुक एवं वाट्सअप का इस्तेमाल करते है।

 

. तथ्यों के संकलन हेतु प्रयुक्त उपकरण एवं प्रविधि- प्रस्तुत अध्ययन हेतु सााक्षात्कार अनुसूची उपकरण का उपयोग एवं अवलोकन प्रविधि का उपयोग किया गया है, इसके अलावा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष वार्तालाप के द्वारा भी तथ्यों का संकलन किया गया है।

 

. प्राप्त तथ्यों का वर्गीकरण, सारणीयन, विश्लेषण तथा प्रस्तुतीकरण-

प्राथमिक तथ्यों के संकलन के पश्चात् इनका वर्गीकरण, सारणीयन एवं विश्लेषण कर तथ्यों का प्रस्तुतीकरण किया गया हैं।

 

 

तालिका से स्पष्ट है कि वाट्सअप एवं फेसबुक इस्तेमाल करने वाले उत्तरदाताओं में तीन - चैथाई उत्तरदाता पुरूष एवं एक - चौथाई उत्तरदाता महिलाएं है। निष्कर्शतः कहा जा सकता है कि महिलाओं की अपेक्षा पुरूषों के द्वारा वाट्सअप एवं फेसबुक का उपयोग किया जाता है।

 

उपरोक्त तालिका से स्पष्ट होता है कि सबसे ज्यादा वाट्सअप एवं फेसबुक का इस्तेमाल 28-32 आयु समूह के व्यक्तियों द्वारा किया जाता है,उसके पश्चात् 32-36 आयु समूह के व्यक्तियों द्वारा वाट्सअप एवं फेसबुक का इस्तेमाल किया जाता है, इसी प्रकार 20-28 आयु समूह के व्यक्ति भी वाट्सअप एवं फेसबुक का उपयोग करते है। इस शोध अध्ययन में इस तथ्य की पुष्टि हुई कि वर्तमान तें टीनेजर्स ग्रुप भी वाट्सअप एवं फेसबुक के संपर्क में है तथा धीरे-धीरे 45 से अधिक आयु समूह का व्यक्ति भी इनके संपर्क में जुड़ते जा रहे है।

 

अतः स्पष्ट है कि वर्तमान में प्रत्येक आयु वर्ग का व्यक्ति फेसबुक एवं वाट्सअप का उपयोग कर रहा है।

 

उत्तरदाताओं में सबसे अधिक किस सामाजिक मीडिया को उपयोग में लाया जाता है जानने पर ज्ञात हुआ कि लगभग तीन चैथाई उत्तरदाता वाट्सअप का एवं एक चैथाई उत्तरदाता फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं।

 

सकारात्मक प्रभाव

 

सामाजिक मीडिया के इस्तेमाल का स्वरूप सामाजिक मीडिया के इस्तेमाल का स्वरूप ज्ञात करने पर इस तथ्य की पुष्टि हुई कि लगभग 40.4 प्रतिशत सहकर्मी एवं अधिकारी से संपर्क बनाए रखने हेतु वाट्सअप एवं फेसबुक का इस्तेमाल करते है। 28.4 प्रतिशत उत्तरदाता दोस्तों से संपर्क बनाए रखने हेतु, 18 प्रतिशत उत्तरदाता पारिवारिक सदस्यों से संवाद एवं संपर्क बनाए रखने हेतु, जबकि 13प्रतिशत उत्तरदाता वर्तमान सामाजिक घटनाओं की जानकारी लेने हेतु सामाजिक मीडीया का उपयोग करते हैं।

 

लिंकटिच(2012) ने भी इस कथन की पुष्टि की है कि सामाजिक मीडीया का उपयोग व्यक्ति पारिवारिक सदस्यों से संपर्क बनाए रखने के लिए कम अपितु दोस्तों सहकर्मीयों एवं अधिकारियो के साथ वार्तालाप एवं संवाद बनाए रखने के लिए ज्यादा करते हैं।5

 

सामाजिक मीडिया के द्वारा दूर -दराज के रिश्तेदारों से संपर्क में रहने संबंधी तथ्यों से स्पष्ट हुआ कि वर्तमान में अधिकांष उत्तरदाता रिष्तेदारों से संपर्क में वने रहते हैं बहुत कम उत्तरदाता हैं, जो संपर्क मंे रहना पसंद नहीं करते।

 

रिश्तेदारों से संपर्क का स्वरूप जानने पर यह ज्ञात हुआ कि अध्ययनगत समूह के 50 प्रतिशत उत्तरदाता मोबाईल से बातचीत करके, 28.8 प्रतिषत उत्तरदाता स्वयं जा कर एवं शेष 21.2 प्रतिशत उत्तरदाता संदेष एस.एम.एस करके रिष्तेदारों सक संपर्क बनाए रखना है। इस तरह कहा जा सकता है कि वर्तमान टेक्नोलाॅजी ने प्रत्यक्ष संपर्क के दर को कम कर रहा है और अप्रत्यक्ष संपर्क के दर को बढा रही है। यही कारण है कि वर्तमान में रिष्तों के बीच के अपनत्व की भावना घटती जा रही है। अतः रिष्तेदारों के घर आने-जाने की अवधि में कमी परिलक्षित हो रही है। इस कथन की पुष्टि जीत टेलर(2007) ने अपने अध्ययन में की हैं।6इसी तरह फ्लोरिक ब्राजील ने (2009) ने अपने अध्ययन से यह निष्कर्श निकाला है कि मोबाईल फोन सामाजिक संबंधों को नुकसान पहुंचा रहा है वर्तमान में व्यक्ति रिश्तेदारों से प्रत्यक्ष संदर्भ स्थापित करना पसंद नहीं कर रहे है।7

 

 

 

उपर्युक्त तालिका क्रमांक-07 के विश्लेषण से स्पष्ट है कि मोबाईल फोन में वाट्सअप एवं फेसबुक का सर्वाधिक उपयोग विद्यार्थियों के द्वारा किया जाता है तत्पश्चात् कार्यशील पुरूषों के द्वारा किया जाता है, कामकाजी महिलाएं कार्यशील पुरूष के बाद वाट्सअप एवं फेसबुक का उपयोग करती है, यहाॅ सबसे चैकाने वाले तथ्य प्राप्त हुए है जिसमें अकार्यशील

 

पुरूष तो सोशल मीडिया के संपर्क में है परंतु अकार्यशाील महिला का संपर्क बिल्कुल ही नहीं है जो इस तथ्य की पुष्टि करता है कि अकार्यशील महिलाओं को परिवार के सदस्यों द्वारा हमेशा हर प्रकार की सुविधा से वंचित रखा जाता है।

 

डत्ठ तमचवतज 2015 ने आॅल इंिण्डया आधार पर मोबाईल यूजरों की संख्या का सर्वे किया जिसमें इन्होंनंे इस तथ्य की जानकारी की पूरे जनसंख्या का 2/3 भाग अर्थात 375 मिलियन भारतीय इंटरनेट में सामाजिक मीडिया का उपयोग करते हैं, इसमंे भी 120 मिलियन भारतीय विद्यार्थी, 26 प्रतिशत युवा वर्ग,11प्रतिशत वृध्द  व्यक्ति ,एवं 7 प्रतिशत  नौकरी करने वाली महिलाएं इंटरनेट मोबाईल ंचच का उपयोग करती हैैं बाकी 17 प्रतिषत अकामकाजी महिलाएं इंटरनेट मीडीया से संपर्क नहीं बना पाती है।8

 

लिंग आधारित अध्ययन में उपयोगकर्ताओं के बारे में इस तथ्य की पुष्टि कि नगरीय ़क्षेेत्र की 38प्रतिशत महिलाएं एवं 62प्रतिशत पुरुष तथा ग्रामीण क्षेत्र में 12प्रतिशत महिलाएं एवं 88प्रतिशत वाट्सएप एवं फेसबुक का उपयोग करते हैं।9

 

सामाजिक मीडिया पर प्राप्त संदेशों पर प्रतिक्रिया देने के संबंध में 82प्रतिशत उत्तरदाताओं ने लोगों की मदद करने से संबंधित प्रतिक्रिया जाहिर की, 62प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अपनी राय भेजकर तथा 30 प्रतिषत उत्तरदाताओं द्वारा प्राप्त तथ्यों की आलोचना की जाती है जबकि बाकी उत्तरदाताओं द्वारा किसी प्रकार की प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की जाती हैै कई उत्तरदाता ऐसे हैं जो सामाजिक मीडीया से कोई मतलब ही नहीं रखते।

 

 

नकारात्मक प्रभाव

व्यक्ति के व्यक्तित्व पर सामाजिक मीडिया का प्रभाव ¢ इस तथ्य की पुष्टि हुई कि आध्ो से अधिक उत्तरदाता नींद पूर्ण होने की समस्या से ग्रसित है, एक -चैथाई उत्तरदाता मानसिक तनाव एवं शेष 92 प्रतिशत उत्तरदाता बेचैनी महसूस करते हैं।

 

निष्कर्षतः कहा जा सकता हैकि फेसबुक एवं वाट्सएप पर मैसेज एवं काॅल आने संबंधि गतिविधियों एवं भ्रम के कारण उत्तरदाता सामान्यता आधी रात तक जागरण कर जाते हैं जिसके कारण बेचैनी महसूस होती है। यदि मैसेज या काॅल व्यक्ति के इच्छा के विपरित रहा तो उसे मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ता है।10

 

आॅक्सफोर्ड विष्वविद्यालय के न्यूरो साइंटिस्ट बोरोनेस सुसान ग्रीनफील्ड  ने इस बात का अन्देषा दिया है कि सामाजिक नेटवर्किंग का जीवन पर्यंत प्रभाव बना रहता है।11 ब्रिटिष मनोषास्त्री सोसदरी ने इस कथन की पुष्टि की है।12

 

वाट्सअप एवं फेसबुक के द्वारा वर्तमान में पति -पत्नि के बीच तलाक का ग्राफ बढ़ गया है। फेसबुक एवं वाट्सअप पर पति या पत्नि दोनों में से किसी एक के द्वारा हमेषा चैंटिंग करते रहने के कारण पति-पत्नि में विवाद उत्पन्न हो रहा है अंत में विवाद का परिणाम तलाक का रूप धारण कर लेता है जब से मोबाईल फोन में वाट्सअप ,फेसबुक एवं अन्य प्रकार के नये तकनीक उपलब्ध हुए है। तब से केवल परिवार मेें कलह बढ़ रहा है। अपितु दोस्तों ,रिष्तेदारों अन्य संबंधियों से रिश्त भी खराब होते जा रहें है ंजो कि गंभीर चिंतन का निबंध है।

 

सामाजिक मीडिया के द्वारा दूर -दराज के रिश्तेदारों से संपर्क में रहने संबंधी तथ्यों से स्पष्ट हुआ कि वर्तमान में अधिकांश उत्तरदाता रिश्तेदारों से संपर्क में वने रहते हैं बहुत कम उत्तरदाता हंै जो संपर्क मंे रहना पसंद नहीं करते।वाट्सएप एवं फेसबुक पर यदि कोई दोस्त या रिश्तेदार गलत मैसेज भेज देता है या बोल देता है जो हमारा पूरा मूड खराब हो जाता है और इस मुछ का असर हमोर पूरे कार्यों पर भी पढ़ता है।

 

स्पष्ट है कि वाट्सअप एवं फेसबुक से जुड़ने के लिए आॅनलाइन रहना जरूरी है जितने देर तक आॅललाइन होंगे उतना ज्यादा खर्च का अतिभार बढ़्रेगा जो व्यक्ति मोबाईल में वाट्सअप एवं फेसबुक पर दिन भर व्यस्त होते हैं उनका आर्थिक भार भी बढ़्रने लगता है यदि व्यक्ति अपना आर्थिक भार वहन करने में स़़़क्षम नहीं देता काइय रेट भी बढ़ने लगता है।

 

तालिका से स्पष्ट होता है कि वाट्सअप एवं फेसबुक के उपभोगकत्र्ता सामान्यतः अपने आस-पास रहने वाले व्यक्तियों को भी नजर अंदाज कर जाते है, यही कारण है कि वर्तमान में सामाजिक संबंधों में कड़वाहट या दूरिया बढ़ती जा रही है रिचर्सन ने अपने अध्ययन में बताया कि जहाॅ बच्चे बड़ंे बुध्दिमान व्यक्ति भी वाट्सअप एवं फेसबुक से अपनों को नकार रहे है।13

 

तालिका से प्रदर्षित है कि वाटसअप फेसबुुक से पारिवारिक रिश्तों में तनाव एवं कड़वाहट उत्पन्न हो रहा है, तनाव कड़वाहट का कारण जानने पर ज्ञात हुआ कि मोबाईल फोन की व्यस्तता के कारण व्यक्ति अपने परिवार को समय नहीं दे पाता है, समय दे पाने की वजह से पारिवारिक रिश्तों में मतभेद उत्पन्न हो रहा है।

 

निष्कर्ष:-

अतः कहा जा सकता है कि सामाजिक मीडिया समाज पर सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों प्रकार का प्रभाव पड़ रहा है लेकिन यह प्रभाव युवाओं पर नकारात्मक एवं सामान्य आयु समूह के व्यक्तियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

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(1)       https //www. Statista.com, statistics and market data on social media & users –generated content .

(2)       https//en.m Wikipedia .org. and IMRB-I-cube –oct. 2015.

(3)       राय, उमेेश कुमार (2014) ,सामाजिक मीडिया का बढ़ता दायरा वरदान भी अभिशाप भी, एड्रपिडिया प्रकाशन] Sahitya Samhita .org

(4)       Source –nagar, nigam, office, Raipur Chhattisgarh ,

(5)       Rich, Line (2012) New Technique  and  New Relation , New Tech, New Ties , now mobile communication is reswaping social conesion commutiages, word press organization ,pp-89 .

(6)       Taylor ,Jim (2007), Raising generation, tech, media fueled world , pp- 205-207.

(7)       ब्रीजल ,फ्लोरिक,(2009), उवइपवसवहल व्यक्तियांें एवं समुदायों पर मोबाइल फोन का प्रभाव http: www.com/essey/ chicago .

(8)       http://www.statista.com >statistics>num> india

(9)       IMRB-I CUBE -2015 october 2015,http://www.statista. com.

(10)     Lorea,Grush(2015), The Internet Probably isn’t harming Kids, Brains, The Debat over Disital Technology and young people, The British medical Journal pp-151

(11)     Marie,Rina(2016)- Lack sleep? Check your social media Habits, New Study Suggest The Journal of Preventive medicine, Vol.-85.pp-36-41

(12)     Jan van den Bulck(2016), Bed Time Mobile Phone use and Sleep in Adults,Social science&Medicine,Vol-148, pp-93-101

 (13)Social Media and Networking: The Good and Bad effects on Kids

 

 

 

Received on 11.01.2017       Modified on 12.02.2017

Accepted on 20.03.2017      © A&V Publication all right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 5(1): Jan.- Mar., 2017; Page 07-11 .